Wednesday, 17 June 2009

तुम मिले तो दिल खिले...



यू तो आप अपने पार्टनर से कई बार और कई जगह मिले होंगे लेकिन इस बार मौका है अपनी पहली वेडिंग एनीवर्सी को सेलिब्रेट करने का। इस खास दिन के लिये होना चाहिए एक स्पेशल अरेेंजमेंट। आखिर आपकी पहली सालगिरह है तो आपकी व आपके पार्टनर की बहुत सी तमन्नाएं होंगी। जिसे वो पूरा करना चाहती है। तो इसीलिये इस दिन को बनाने के लिये बस कुछ सिम्पल टिप्स।अब देखिए आपकी प्यार भरी जिंदगी में सबसे पहला डे आया है तो इसे तो खास बनाना ही है, पर बिलकुल आपकी पहली मुलाकात की तरह...। वैसे तो इससे पहले इस दिन को रोमांटिक बनाने के लिए आप अपने तईं प्लानिंग कर ही रहे होंगे लेकिन समस्या ये है कि क्या करें और क्या न करें? चलिए हम आपकी मुश्किल आसान किए देते हैं और आपको बताते हैं कि कैसे आप इस वेलेंटाइन डे को जीवन का एक यादगार क्षण बनाएंगे।


* सालगिरह से एक दिन पहले की रात को बारह बजे बाद अपने पार्टनर को फोन या एसएमएस करें और बधाई दें। एक बात ध्यान रखें कि ऐसा जरूरी नहीं है कि रात में फोन करें ही, आप सुबह भी फोन कर सकते हैं।


* एक सुंदर सा बुके अपने पार्टनर के पास भिजवाएं, जिसमें आपके दिल की बात कहता हुआ एक ग्रीटिंग कार्ड हो या फिर एक कैसेट।


* आप अलग-अलग तरह के कार्ड्स इक_े करके भी अपने पार्टनर के पास पहुंचा सकते हैं।


* उनके ई-मेल पर ढेरों कार्ड्स मेल करें, जो आपके दिल की बात कहते हों और कुछ ऐसे भी कि जिन्हें देखकर उनके होंठों पर मुस्कुराहट फैल जाए।


* अचानक आपके पार्टनर के ऑफिस या घर पहुंचकर उन्हें चौंका दें।


* आजकल तो एफएम का जमाना है तो इसीलिये अपने दिल की बात को एफएम के सहारे भी बोल कसते है या फिर उनके नाम का कोई लव नोट...।


* ये तो कुछ वो बातें थीं, जिनसे आप उन्हें चौंका सकते हैं या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी भावनाएं उन तक भेज सकते हैं। आइए अब जरा शाम के कार्यक्रम पर नजर डालें। आखिर शाम की गुलाबी रंगत ही तो देगी आपको और उन्हें वो गुलाबी अहसास, जो आपके जीवन का सबसे खास क्षण होगा।


* इस शाम को यादगार और रोमांटिक बनाने के लिए किसी ऐसी जगह का चुनाव करें, जहां ज्यादा भीड़ न हो। ताकि आप और वो अपने खूबसूरत लम्हों को एक-दूसरे से बांट सकें।


* किसी होटल या रेस्टॉरेंट में कैंडल लाइट डिनर करें और धीमे-धीमे मधुर संगीत पर बांहों में बांहें डाल थिरकते रहें, जब तक आपका जी चाहे।


* डिनर के लिए पूल साइड की टेबल भी बुक करवा सकते हैं, जहां पानी से उठती ठंडी हवाएं और वातावरण में गूंजता हल्का संगीत मिलकर बना देंगे आपकी शाम और भी ज्यादा रोमांटिक।


* यदि आप दोनों बहुत मस्ती-मजाक पसंद करते हैं तो फिर इस शाम को करें कुछ ऐसा, जिससे वो हंस-हंसकर लोटपोट हो जाएं।


* देखिए ये तो सिर्फ कुछ आइडिया हैं, अब आप तो अपने पार्टनर के बारे में अच्छे से जानते ही होंगे तो फिर बनाइए ना कुछ अलग, कुछ खास इस दिन को। आखिर कुछ हसीन यादें ही तो होती हैं, जिन्हें जीवन भर किसी सुनहरी पोटली में सहेजकर रखा जा सकता है।

आसमा से उपर....


आसमा से उपर....
एक उड़ान की ख़्वाहिश है..!!
जहाँ हो हर क़दम सितारो पर....
उस ज़मीन की ख़्वाहिश है..!!
जहाँ पहचान हो लहू की हर एक बूँद की....
उस नाम की ख़्वाहिश है..!!
जहाँ खुदा भी आके मुझसे पूछे.....
"बता, क्या लिखू तेरे मुक्क़दर मे....?"
उस मुकाम की ख़्वाहिश है..!!
उस मुकाम की ख़्वाहिश है..!!

Tuesday, 19 May 2009

यूँ तो 'मित्र' का तमग़ा अपने नाम के साथ लगा कर घूमता हूँ,


ना ज़मीन, ना सितारे, ना चाँद, ना रात चाहिए,दिल मे मेरे, बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए,

ना दुआ, ना खुदा, ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए, मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी का हाथों मे हाथ चाहिए,

कहूँ ना मै कुछ, समझ जाए वो सब कुछ, दिल मे उस के, अपने लिए ऐसे जज़्बात चाहिए,

उस दोस्त के चोट लगने पर हम भी दो आँसू बहाने का हक़ रखें, और हमारे उन आँसुओं को पोंछने वाला उसी का रूमाल चाहिए,

मैं तो तैयार हूँ हर तूफान को तैर कर पार करने के लिए, बस साहिल पर इन्तज़ार करता हुआ एक सच्चा दिलदार चाहिए,

उलझ सी जाती है ज़िन्दगी की किश्ती दुनिया की बीच मँझदार मे, इस भँवर से पार उतारने के लिए किसी के नाम की पतवार चाहिए,

अकेले कोई भी सफर काटना मुश्किल हो जाता है, मुझे भी इस लम्बे रास्ते पर एक अदद हमसफर चाहिए,

यूँ तो 'मित्र' का तमग़ा अपने नाम के साथ लगा कर घूमता हूँ, पर कोई, जो कहे सच्चे मन से अपना दोस्त, ऐसा एक दोस्त चाहिए!

दूरियों से फर्क पड़ता नहीं
बात तो दिलों कि नज़दीकियों से होती है
दोस्ती तो कुछ आप जैसो से है
वरना मुलाकात तो जाने कितनों से होती है
दिल से खेलना हमे आता नहीं
इसलिये इश्क की बाजी हम हार गए
शायद मेरी जिन्दगी से बहुत प्यार था उन्हें
इसलिये मुझे जिंदा ही मार गए
मना लूँगा आपको रुठकर तो देखो,
जोड़ लूँगा आपको टूटकर तो देखो।
नादाँ हूँ पर इतना भी नहीं ,
थाम लूँगा आपको छूट कर तो देखो।
लोग मोहब्बत को खुदा का नाम देते है,
कोई करता है तो इल्जाम देते है।
कहते है पत्थर दिल रोया नही करते,
और पत्थर के रोने को झरने का नाम देते है।
भीगी आँखों से मुस्कराने में मज़ा और है,
हसते हँसते पलके भीगने में मज़ा और है,
बात कहके तो कोई भी समझलेता है,
पर खामोशी कोई समझे तो मज़ा और

Thursday, 14 May 2009

मेरा एडमिशन तो पक्का...


कहते है ना बच्चों की परवरिश और भविष्य का संवारना एक ऐसी जिम्मेदारी है जिसमें सारी जिंदगी भी कम सी लगती है। लेकिन यदि आपसे कोई पूछे कि आपका बच्चा कितने साल की उम्र में स्कूल जाना शुरू हुआ था तो आप कहेंगे वही जिस नॉर्मल उम्र में सब बच्चे स्कूल जाना शुरू करते है। लेकिन यदि आपसे यह कहा जाये कि आपके बच्चे का ऐडमिशन जन्म के साथ ही स्कूल में हो जायेगा तो आप कहेंगे वो कैसे? जी हां अब उसको स्कूल में जाने के लिये दो साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जन्म से पहले ही उसकी ऐडमिशन और जन्म लेते ही स्कूल में एंट्री। शैमरॉक स्कूल के मैनेजिंग डायरेक्टर अमोल अरोड़ा का कहना है कि हमारे प्ले स्कूल से यह कॉन्सेप्ट की शुरूआत हुई है। और कई अभिभावकों ने हमारे यहां पर फोन व मेल करके हमें इस कॉन्सेप्ट के बारें में पूछा। अभी वो जन्म से पहले ही उनका रजिस्ट्रेशन करवाकर जन्म के बाद यहां स्कूल में भेजने को तैयार हो गये है। उन्होंने कहा कि अब उनको दो वर्ष तक का इंतजार करना भी गवारा नहीं है। रिसेशन के टाइम में भी पेरेंट्स और प्ले स्कूल के लिये यह कॉन्सेप्ट फायदे का सौदा हो रहा है। आगे अरोड़ा जी ने कहा कि एडवांस ऐडमिशन पेरेंट्स को जेब का फायदा भी दें रही है जैसे कि उनको फीस आदि में डिसकाउंट आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा मदर्स प्राइड की वर्किंग डायरेक्टर एंड हेड पब्लिक रिलेशन की सरिता सयाल ने कहा कि एडवांस ऐडमिशन को चाह रहे है। और इसमें एडमिशन लेना भी आसान है। बस जब वो बच्चे का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिये आएंगे तो उनका टोकन आमंउट ही भरना होगा। इसके अलावा एडवांस एडमिशन के फायदे होंगे कि एडमिशन के बाद बच्चा स्कूल की जिम्मेदारी होगी। और उसके जन्म के बाद उसकी परवरिश और ट्रेनिंग आदि सब स्कूल की देखरेख में ही होगा। इसके अलावा पेरेंट्स को बुलाकर बच्चे की एक्टिविटिस की जानकारी भी उनको दे दी जाएंगी। कुछ अभिभावको ने कहा कि यह ऑप्शन उन पेरेंट्स के लिये काफी अच्छा है जो लोग बिजी रहते है और साथ ही आर्थिक दृष्टिï से भी इसमें फायदा है। मैंने अपने बच्चे के लिये रजिस्टे्रशन करवाया है जिससे मेरे बच्चे का भविष्य अब सुरक्षित है। लेकिन दूसरी ओर कुछ ऐसे भी थे जिनको यह मजाक लगा कि उस बच्चे का एडमिशन हो रहा है जो अभी तक आया ही नहीं। यह एक प्री-स्कूल्स की तरफ से की जा रही एक सोचा-समझा बिजनेस फंडा है। 7 महीने की बच्ची की मां ने कहा कि मैं दो वर्ष पहले ही अपने बच्चों को स्कूल में आखिर क्यों भेजूं। सबके विचार और सोच अपनी-अपनी। लेकिन कुछ भी कहें जिस तरह से आज स्कूल्स की फीस बढ़ाने और एडमिशन की कटौती के झंझटों से मुक्ति पाने की यह नयी पहल काफी सुखद नजर आती है।

सोचो मत, ब्लॉग खोलो!

आज हर जगह मेरा ब्लॉग, तेरा ब्लॉग को लेकर आपसी लड़ाई सुनने व देखने को मिलती है। जिसका जो मन में आया वो लिख डाला। फिल्मों का सुपरस्टार अपने परिवार की तरह मानता है ब्लॉग को। सुपरस्टार से पूछती हूं कि सर आज कुछ ही महीने पहले आपने अपना ब्लॉग लिखना आरंभ किया, तो आज ब्लॉग आपका परिवार बन गया। इस बात का दूसरा अभिप्राय यह भी कि कहीं आजकल उम्रदाराज होने पर आपके पास समय की व्यस्तता थोड़ी कम है तो आपका ध्यान और प्यार अपने नये-नये पैदा हुए ब्लॉग पर तो नहीं चला गया। लेकिन ब्लॉग्स की व्यथा थोड़ी सोचने लायक हो जाती है। पहला ब्लॉग: यार मेरे ब्लॉग का मालिक तो अमीर है और स्टाइलिश भी। दूसरे ब्लॉग ने पूछा वो कैसे? पहला ब्लॉग: अमीर ऐसे कि उसके बाद काम करने को कुछ है ही नहीं, जब देखो मुझ पर ही अपना समय लगाता है। और स्टाइलिश ऐसे कि जब वो लिखता है तो किसी ना किसी के खिलाफ ही लिखता है। दूसरा ब्लॉग: सोचने वाली बात तो है। पहला ब्लॉग: तू बता तेरा ब्लॉगर कैसा है? दूसरा ब्लॉग: मेरा ब्लॉगर तो कोई साहित्यकार लगता है, या फिर कोई खाली टाइमपास इंसान। पहला ब्लॉग: वो कैसे? दूसरा ब्लॉग: अरे, ब्लॅाग भाई क्या सुनाऊं तुमको। आजतक पकड़ ही नहीं पाया। लेकिन सोचा कि वो साहित्यकार इसीलिये कि जब भी वो कोई लेख, कविता, कहानी, व्यग्ंय आदि लिखता है तो अचानक उसके बाद प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो जाती है। पहला ब्लॉग: अच्छा, दूसरा ब्लॉग: और दूसरा वो टाइमपास इंसान होगा कि जब देखो किसी अन्य इंसान का ब्लॉग खोलता है और अपने ब्लॉग से उसको टिप्पणी करता रहता है। सोचो यार ब्लॉग, मेरा क्या हाल हो गया होगा। इसी बीच दो अन्य ब्लॉग्स भी इस वार्तालाप का हिस्सा बन गये। तीसरे ने बोला सही बोल रहे हो भइया? आजकल तो ब्लॉग्स यानि कि हमको लेकर आपसी लड़ाई लडऩे को तैयार है। चौथा ब्लॉग बोल उठा कि यार उस लड़ाई का हिस्सा हम ही तो हैं। सोचो हमने क्या किसी को निमंत्रण पत्र देकर बोला था आओ ब्लॉग लिखो। जब किसी को किसी दूसरे पर छींटाकशी करनी होती है तो बस लिखने बैठ जाता है ब्लॉग। पहला बोल उठा: तुम काहे परेशान हो रहे हो जब लिखने वाले परेशान ना होते तो तुमको का? चौथा ब्लॉग बोला: भइयां जी! दुख ब्लॉग लिखने का नहीं है दुख तो इस बात का है कि यदि आप किसी की भलाई के लिये, किसी को अन्य विषयों की जानकारी देने के लिये, हिंदी भाषा के सुधार के लिये, या फिर दूसरी भाषाओं के छात्र-छात्राओं को जागरूक करने के लिये ब्लॉग लिखते तो क्या फायदा ना होता। पहला ब्लॉग बोला: हां यह तो है! तीसरा ब्लॉग, दूसरा ब्लॉग सभी ने उसके दर्द को पहचाना। चौथा ब्लॉग बोला: आखिर में लोग ब्लॉग लिखने का असली मकसद भूल गये हैं उनको यह लगता है कि ब्लॉग तो ऐसा स्थान है जहां पर आप अपनी दिल की भड़ास निकाल सकते हो। चाहे वो पढऩे वालों को पसंद आये या ना आये। सभी ब्लॉग एक स्वर में बोले हां यह तो है। चौथा ब्लॉग बोला: ब्लॉग का असली मकसद है एक अंजान व्यक्तियों को एक-दूसरे से जोडऩा। जिससे वो एक-दूसरे के विचारों को जान सकें। उन्हें आगे बढऩे का रास्ता दे सकें। फिर से सभी ब्लॉग एक स्वर में बोलें। पहला ब्लॉग बोला यह तो तुम सही कह रहे हो कि जब जिस किसी का मन करता है वो अपनी गालियां लिख देता है। किसी मुद्दे पर भड़ास निकालनी हो तो चलो यार ब्लॉग पर लिख डालें। सोचना होगा कि आखिर ब्लॉग का जन्म क्यों किया गया। पहलेपहल हम आए डिजिटल डायरी की शक्ल में। लेकिन अब तो अपनी शक्ल भी पहचान में नहीं आती। अब तो भइये ऐसा है कि अपनी भाषा के ज्ञान को विचारों की स्याही में भिंगोकर जिन शब्दों का उच्चारण वहां पर किया जायेगा वो ब्लॉग की शक्ल लेगा। दूसरा ब्लॉग बोला: लेकिन जो लिखा गया वो कई बार बुरा भी तो लग सकता है ना? पहला ब्लॉग बोला: हां क्यों नहीं, लेकिन आप उसका जवाब किस भाषा में दें रहे हो यह भी देखना होगा। आपको विकास की ओर जाना है ना कि ब्लॉग की आग फैलानी है। ब्लॉग तो एक माध्यम है आपकी भाषा के विकास का। तीसरा ब्लॉग बोला: हां सही तो है कि ब्लॉग का विकास यानि बोलियों का संक्रमण या पहले से ताकतवर भाषा का विकास। इसीलिये ब्लॉगर्स को अपनी लेखनी पर विकासशील चिह्नï लगाना होगा ना कि एक-दूसरे पर फब्तियों का रंग। इस तर्क-वितर्क पर सभी ब्लॉग एक स्वर में बोल उठे- कुछ तो सोचें हमारे भी दर्द को, जब कोई लेख पढऩे के बाद हम पर उंगली उठाता है तो हमें कितना दुखता होगा। पहला वाला ब्लॉग बोला: छोड़ो भाइयों इस जनता को हमारे दुख से क्या लेना? चौथा ब्लॉग बोला: सही कहा लेकिन एक बात तो सोचने योग्य है कि इस लड़ाई में आखिर जीत किसकी और हारा कौन? सभी एक स्वर में बोले कोई नहीं। एक बात बताओ हमारा यूज इतना ज्यादा क्यों बढ़ गया है? दरअसल ऑनलाइन मार्केट से अपना हिस्सा पाने में हम पहली सीढ़ी का काम करते हैं। पहले ब्लॉग खोलकर अपनी पहचान बनाओ/बढ़ाओ। ये क्लास पास होने पर पोर्टल बनाओ या फिर वेबसाइट का मिनिमल चार्ज देकर ऐड की मलाई मारो। यह तो हुई बेरोजगारों की बात। अब बात करते हैं अमिताभ बच्चन जैसे रोजगारियों की। पहले से ऐसे लोग अपनी खांसी अपने प्रशंसकों को सुनाने का बहाना लेकर हमारा इस्तेमाल करते हैं। अब चूंकि इनकी हर बात क्रांतिकारी या कंट्रोवर्सियल होती है सो बिना मांगे इन्हें बढिय़ा पैकेज के साथ नामी-गिरामी प्रायोजक मिल जाता है। एक बात बताओ जब आदमी चलने से लाचार होने लगेगा तो एक टाइपिस्ट रखकर कितनी कमाई कर लेगा हमारे जरिये। सोचो मत, ब्लॉग खोलो!

Sunday, 10 May 2009

थोड़ा तो पास आओ...

कहते है जहां पर प्यार होता है वही नाराजगी भी होती है। रिलेशनशिप में प्यार, मोहब्बत के बीच छोटी-मोटी लड़ाई व नाराजगी भी चलती रहनी चाहिए, क्योंकि इससे रिश्ते ही गहराईयों का अंदाजा हो जाता है। गर्मियों के दिन है और छुट्टिïयों की सौगात, तो क्यों ना हो जाये एक एक ब्रेक लेने का टाइम। जिससे रिश्ते की नाराजगी को भी पूरी तरह से खत्म करके नजदीकियों में बदला जाये। जी हां, जब रिलेशन में दूरियों का एहसास होने लगे और तनाव ज्यादा बढऩे लगे तो जरूरत है एक ब्रेक की, जिसमें आप अपनी रिलेशनशिप को ओर भी ज्यादा मजबूत करने में कामयाब हो सकें। मौका है अपनी छुट्टियों को अच्छे से प्लान करने का। दरअसल, अधिकतर लोग अपनी छुट्टियां पिकनिक, डिनर या फिल्म देखकर बिताते हैं। वैसे, अगर आप अपना फ्री टाइम अपने पार्टनर के साथ बिताएंगे, तो आप दोनों के बीच के तनाव की जगह पुराना रोमैंस ले लेगा। - आप अपनी प्यार की गाड़ी को ट्रैक पर लाना चाहते हैं, तो अपनी छुट्टियां अपने पार्टनर के साथ बिताएं। दरअसल, एक-दूसरे के साथ समय बिताने पर आप दोनों के बीच का मन-मुटाव दूर हो जाएगा। साथ ही, साथ समय बिताने से आपको यह भी पता चल जाएगा कि आपका पार्टनर आपसे क्या चाहता है। - आप अपने पार्टनर के साथ जो भी समय बिताएं, उस दौरान उसे इस बात का अहसास दिलवाएं कि आप उसे बहुत प्यार करते हैं। बेशक उसमें आया बदलाव आप कुछ ही देर में नोटिस करने लगेंगे। - आप जब अपने पार्टनर के साथ लंबा समय बिताते हैं, तो छोटी-मोटी बात पर बहस होना लाजमी है। ऐसी सिचुएशन से बचने के लिए आप सुनने की आदत डालें। ऐसा करने से बहस बढऩे की बजाय जल्दी खत्म हो जाएगी। - जब भी अपने पार्टनर के साथ समय बिताएं, तो शिकायतों का पिटारा खोलकर न बैठ जाएं। बल्कि ऐसे में अपनी फीलिंग्स, इमोशंस, फेवरिट बुक्स, फिल्म, फ्रेंड्स, अपनी जॉब और अपनी लाइफ को कैसे एंजॉय करें जैसे मुद्दों पर बातचीत करें। - अगर आपकी अपने पार्टनर से बहस हो गई है, तो अगले दिन अपना बिहेवियर नार्मल रखें। - तनाव को बढ़ाये नहीं और ना ही एक-दूसरे की गलतियों को गिनाने का प्रयास करें। बल्कि जो हुआ सो हुआ कहकर टाल दें। - फीमेल पार्टनर की आदत होती है कि मौका मिलते ही शिकायतों का पिटारा लेकर बैठ जाती है इसीलिये इस तरह की कोशिश तो बिल्कुल ना करें। - यदि आप दोनों घर पर समय व्यतीत कर रहे हैं तो छोटे-छोटे काम मिलकर साथ में करें। यदि आप कहीं आउटिंग पर है तो आपके लिये ऑप्शन ओर भी अच्छा है। - दूरियों को कम करने की ड्यूटी सिर्फ मेल्स की ही नहीं होती बल्कि फीमेल्स की भी होती है। यदि आप पहल करेंगी तो आपका पार्टनर भी आपको पूरा सपोर्ट देगा। इसीलिये छुट्टिïयों का उठाइयें फायदा और कम करियें दूरियों को।