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Sunday, 10 May 2009

तराशें अपने आपको...


पढ़ाई खत्म तो करियर बनाने की चिंता, करियर की राह पर चलते हुए आने वाले समय में ऊचांइयों को छूने की चिंता, मेहनत के बाद भी ऊंचाईयों तक ना पहुंच पाने का गम आदि आदि...। ऐसा सिर्फ मेरे साथ ही क्यों होता है, मैं तो इतनी मेहनत करता हूं, मैं तो दूसरों की तरह समय भी बरबाद नहीं करती। फिर क्यों? ऐसी कुछ दुविधा शायद हम सबके पास है लेकिन हम आसपास के लोगों, जगह, काम आदि में कमियों को तलाशते रहते है लेकिन कभी भी अपने आपमें कमी को ढूंढने का प्रयास नहीं किया। अपनी किस्मत को कोसने से अच्छा है कि हम अपनी कमियों को मेहनत की भट्टïी में पकाकर एक कामयाब इंसान बनने की राह पर आ सकें। स्वयं का आकलन करने के लिये निम्न बिंदुओं पर अवश्य ही ध्यान दें: मान (वैल्यू) इसके अन्तर्गत वे वस्तुएं आती हैं जिनका महत्व आपकी नजरों में बहुत अधिक होता है, जैसे कि उपलब्धियां (अचीवमेंट्स), प्रतिष्ठा (स्टेट्स), स्वत्व (ओटोंमनी) आदि। रुचियाँ (इंट्रस्ट) इसके अन्तर्गत आपको आनन्द प्रदान करने वाली वस्तुएं आती हैं, जैसे कि मित्रों के साथ लिप्त रहना , क्रिकेट खेलना , नाटक में अभिनय करना आदि। व्यक्तित्व (पर्सनेलिटी) अलग अलग लोगों का अलग अलग व्यक्तित्व होता है जो उनकी विलक्षणता (ट्रेट्स), आवश्यकता (नीड), रवैया (एटीट्यूट), व्यवहार (बिहेवियर) आदि का निर्माण करती हैं। अहर्ताएँ (स्किल्स) अलग अलग व्यक्तियों की अहर्ताएं या योग्यताएं (स्किल्स) भी अलग अलग होती हैं जैसे कि किसी को लेखन कार्य (राइटिंग) में आनन्द आता है तो किसी को शिक्षण कार्य (टीचिंग) या फिर किसी को कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग में। ऊपर लिखी गई बातों के आधार पर ही आप अपने करियर को नई राह देने में कामयाब होती है जिससे आपको मनपसंद जगह पर ही काम करने के अवसर भी मिलते है, और इसी से आपको अपने को तलाशने व तराशने में आसानी होती है।

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